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Tuesday, April 17, 2012

पुरुषों से अधिक ईमानदार व नैतिक होती हैं महिलाएं


लंदन। महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक नैतिक होती हैं। वे अन्य लोगों पर असर डालने वाले मामलों में ज्यादा अच्छे फैसले लेती हैं।'मारेल डीएनए टेस्ट'  महिलाओं व पुरुषों की व्यक्तिगत नैतिकता जानने के लिए है ब्रिटिश अखबार डेली मेल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, अध्ययन में पाया गया कि पुरुषों की तुलना में 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं ज्यादा ईमानदार और उन मामलों में ज्यादा अच्छे फैसले लेती हैं, जब उसका असर अन्य लोगों पर हो।
यह अध्ययन एक सर्वेक्षण पर आधारित है, जिसमें महिलाओं के पुरुषों से अधिक नैतिक होने के संबंध में प्रश्न पूछे गए थे।प्रोफेसर रोजर स्टीयर महिलाओं व पुरुषों की व्यक्तिगत नैतिकता जानने के लिए चार साल पहले किए 'मारेल डीएनए टेस्ट' के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि कार्यस्थल पर प्रवेश करने के साथ लोगों के नैतिक मूल्य और उसूल बदलते हैं। इसके बाद 200 से अधिक देशों में कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से लेकर आम कर्मचारी और घरेलू पत्नियों से विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे गए। उनसे पूछा गया कि क्या आपके सहकर्मियों को आपकी इमानदारी को लेकर किसी प्रकार का कोई शक है।


 प्रोफेसर स्टीयर के मुताबिक, 'महिलाएं दूसरे पर पड़ने वाले प्रभावों के आधार पर अपने फैसले लेती हैं। जिससे उनके फैसले औसतन अच्छे और उचित होते हैं। वहीं, पुरुष फैसले लेते समय व्यक्तिगत दृष्टिकोण रखते हैं और स्वार्थी होकर फैसले लेते हैं।' उन्होंने कहा, 'जब यही बात कार्यस्थल पर लागू होती है, तो पुरुष अपनी सोच परिपक्व नहीं कर पाते हैं। उन्हें अपने अहंकार को एक तरफ रख कर सहयोग से काम करना चाहिए। कार्यस्थल पर काम करने के लिए पुरुषों को समझौते करने होंगे।'

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Indian MPs led by Sushma Swaraj on Lanka visit
सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल श्रीलंका पहुंचा
कोलंबो। श्रीलंका में लंबे समय तक चले गृह युद्ध के बाद प्रभावित क्षेत्रों में भारत की ओर से शुरू की गई विकास परियोजनाओं का जायज़ा लेने के लिए विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज के नेतृत्व में सर्वदलीय सांसदों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार रात यहां पहुंचा इस प्रतिनिधिमंडल का मुख्य ध्यान उन क्षेत्रों पर होगा जो तीन दशक तक गृह युद्ध से प्रभावित रहे हैं।
Pak, India should review deployment of forces at Siachen: Khar
सियाचिन में सेना तैनाती की समीक्षा हो: खार
लाहौर। पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान को हाल ही में सियाचिन इलाके में हिमस्खलन से 138 लोगों के बर्फ में दब जाने की घटना से सबक लेना चाहिए और वहां सेना की तैनाती के बारे में समीक्षा करनी चाहिए भारतीय सीमा से लगे गुलाम कश्मीर के गयारी इलाके में सात अप्रैल को पाकिस्तानी सेना का एक शिविर हिमस्खलन की चपेट में आ गया था, जिससे 127 सैनिक और 11 नागरिक बर्फ में दब गए थे। पाकिस्तानी सेना के जवान अभी भी उनकी तलाश में लगे हुए हैं।
सियाचिन में वर्ष 1984 से ही भारत और पाकिस्तान की सेनाएं तैनात हैं। दोनों देशों के बीच जम्मू-कश्मीर की सीमा के पास संघर्ष विराम समझौते के बाद वर्ष 2003 के अंत से ही वहां दोनों पक्षों की बंदूकें शांत हैं। यहां लड़ाई की तुलना में खराब मौसम के कारण अधिक सैनिक मारे गए हैं।
 Nobel laureate Aung San Suu Kyi
आस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री बॉब कार ने कहा कि म्यांमार द्वारा लोकतंत्र की दिशा में की गई प्रगति के लिए वह अंतराष्ट्रीय समुदाय से इनाम का हकदार है।
Aus to lift sanctions on Myanmar President, 200 others
म्यांमार के राष्ट्रपति से प्रतिबंध हटाएगा आस्ट्रेलिया
मेलबर्न। आस्ट्रेलिया ने म्यांमार में सुधार संबंधी प्रक्रिया शुरू होने के बीच वहा के राष्ट्रपति और 200 से अधिक अधिकारियों पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की घोषणा की है। इन लोगों पर अभी यात्रा और वित्तीय प्रतिबंध लगे हुए हैं।
आस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री बॉब कार ने बताया कि म्यांमार के राष्ट्रपति थेन सेन सहित 260 से अधिक नागरिकों पर यात्रा और वित्त संबंधी प्रतिबंध लगे हुए हैं, जिन्हें हटाया जाएगा।
हालाकि, आस्ट्रेलियन ब्राडकॉस्टिंग कॉरपोरेशन ने खबर दी है कि म्यांमार के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और मानवाधिकार का उल्लंधन करने वाले अन्य संदिग्ध सहित लगभग 130 लोगों का नाम प्रतिबंध सूची में बना रहेगा।
कार ने लंदन में बताया कि आग साग सू की, विपक्ष के अन्य नेताओं, म्यांमार सरकार तथा अन्य देशों से बातचीत करने के बाद हम प्रतिबंध हटा रहे हैं। कार इन दिनों लंदन यात्रा पर हैं।
म्यांमार के 392 लोगों पर आस्ट्रेलिया के साथ वित्तीय लेन-देन या वीजा पर प्रतिबंध लगा है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है इन लोगों में कुछ पर से प्रतिबंध हटने के बाद लगभग 130 लोगों पर यह प्रतिबंध शेष रह जाएगा।

Tuesday, August 2, 2011

बेशर्मी मोर्चा स्लट वॉक



स्लट वॉक  भारत में भी पहुँच आया.यह ग्लोबल वर्ल्ड  व नारी शक्ति का परिचायक  है  रविवार को जंतर-मंतर पर 'स्लट वाक' निकाला गया। 

इस दौरान नुक्कड़ नाटकों के जरिये लोगों को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने की कोशिश की गई। 'स्लट वाक' में शामिल लोगों ने अपने कपड़ों, बांह, पेट पर नारे लिखवा रखे थे। उनके हाथों में तख्तियां भी थीं, जिन पर लिखा था, 'मेरे छोटे स्कर्ट का तुमसे कोई लेना-देना नहीं है,' 'महिलाएं जो कपड़े पहनती हैं, वे यौन हिंसा को आमंत्रित नहीं करते।

दरअअसल, बेशर्मी मोर्चा भारत में शुरू हुए स्लट वॉक का हिंदी नाम है.बेशर्म मोर्चा समाज की सोच बदलने में कितना कामयाब होगा ये कहना तो बहुत मुश्किल है लेकिन इस मोर्चा की शुरुआत सबसे पहले कनाडा में टोरंटो से हुई। जहां एक पुलिस ऑफिसर के बयान से भड़की महिलाओं ने इसके खिलाफ अभियान चला दिया। दो महीने बाद ही महिलाओं ने हजारों की तादाद में जुलूस निकालने शुरू कर दिए। बयान देने वाले पुलिस अधिकारी को आखिरकार माफी मांगनी पड़ी लेकिन ये आंदोलन सारी दुनिया में फैल गया। 

पिछले कई महीनों से जिस स्लट वॉक या उसके भारतीय रूपांतरण 'बेशर्मी मोर्चा' को लेकर मुख्यधारा की मीडिया में खबरें आ रही थीं, आज उस बेशर्मी मोर्चा में शामिल युवक-युवतियों ने जंतर-मंतर पर एकत्रित होकर पार्लियामेंट स्ट्रीट का चक्कर लगाया।महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्राओं का बेशर्मी मोर्चा रविवार को सड़कों पर उतरा. दिल्ली की सड़कों पर बेशर्मी मोर्चा का स्लट वॉक रविवार को पूरी खुमारी के साथ खत्म हो गया. इस वॉक में सैकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लिया. सड़क पर हुई इस सेंसर वॉक का नाम देल्ही स्लट वॉक 2011 दिया गया. इसके मद्देनज़र सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थेमहिलाओं के प्रति पुरुषों की मानसिकता में बदलाव लाने के मक़सद से दिल्ली में 'स्लट वॉक' यानि बेशर्मी मोर्चा निकाला गया.

जंतर-मंतर पर दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा उमंग सबरवाल के आह्वान पर स्लट वॉक यानी बेशर्मी मोर्चा निकाला गया। इसका मकसद महिलाओं के प्रति पुरुषों को संवेदनशील बनाना, और उनकी स्वतंत्रता का सम्मान करना सिखाना है। इसमें देशी-विदेशी युवतियों के साथ युवकों ने भी हिस्सा लिया। बेशर्मी मोर्चा की लड़कियों ने कहा कि कपड़े भड़काऊ नहीं होते, सोच बदलो। 


महिलाओं से छेड़छाड़ की बढ़ती वारदातों, बलात्कार, यौन शोषण और छिटाकशी की घटनाओं को रोकने के लिये दिल्ली में पहली बार स्लट वॉक यानी कि बेशर्मी मोर्चा निकाला गया। यह मोर्चा उस आजादी को हासिल करने के लिये निकाला गया जो महिलाओं को पहनने-ओढ़ने पर रोक लगाता है। यह मोर्चा पुरुषों के उस संकीर्ण मानसिकता के खिलाफ निकाला गया जो महिलाओं को उनके ही खिलाफ हो रहे अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराता है।




 'स्लट वॉक' की शुरुआत कनाडा से हुई, जहां टोरंटो में महिलाओं पर एक पुलिसकर्मी की टिप्पणी पर बवाल खड़ा हो गया था. दरअसल उस पुलिसकर्मी ने कहा कि छेड़खानी से बचने के लिए महिलाओं को स्लट यानि वेश्याओं की तरह कपड़े नहीं पहनने चाहिए. इसी टिप्पणी के बाद 'स्लट वॉक' की शुरुआत हुई और कई देशों में इसकी लहर दौड़ गई



बेशर्मी मोर्चा को दिल्ली पुलिस ने कुछ शर्तों के साथ स्लट वॉक की इजाजत दे दी है. लेकिन इसके साथ उनको यह हिदायत भी दी गयी है कि वे अपनी सीमा में रहकर ही मार्च करे. मार्च के दौरान अश्लीलता के दायरे में आने वाले कपड़ो या हरकतों पर बेशर्मी मोर्चा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है महिलाओं के हक और समान अधिकार के लिए दुनिया के कई देशों में निकाली जा चुकी स्लट वॉक आज दिल्ली के जंतर-मंतर में आयोजित हुआ।